
माँ की गोद आज जिन्हें मयस्सर हो गई
कितने खुशनसीब है जन्नत नसीब हो गई
मिलता नहीं है जिन्हें कभी माॅं का ऑंचल
दुनिया उनकी कितनी आज बेरंग हो गई
माँ की निगहवानी की ताबीर कर ए जिंदगी
इक सदाकत की तहरीर आज जिन्दगी हो गई
माँ के ऑंचल में जन्नत जो मिल गई हमको
माँ हयात व तलबगार सबकी हो गई
जमीं पे पांव रखने पर कांटा न चुभ जाये
धूल पर ऑंचल बिछाने से धूल फूल हो गई
माँ की ममता का कोई मोल क्या देगा
बेटा- बेटी को जन्म देकर खुशनसीब हो गई
डॉ उषा अग्रवाल जलकिरण
छतरपुर मध्यप्रदेश




