साहित्य

चिंता-तनाव

ज्ञान विभूषण डॉ. विनय कुमार श्रीवास्तव

कोई नहीं दुनिया में ऐसा,जिसे कोई भी न हो तनाव।
कुछ न कुछ तो होता है,चाहे कम या ज्यादा तनाव।।
बढ़ती मंहगाई से बढ़े तनाव,जीवन जीना है समस्या।
रोटी कपड़ा मकान की चिंता,ये बड़ी भारी समस्या।।

किसी बच्चों के शिक्षा रोजगार,के अभाव की चिंता।
किसी को बेटा-बेटी के ब्याह,का तनाव और चिंता।।
कुर्सीविहीन राजनेता को,शासन सत्ता से दूरी-तनाव।
सत्ताधारी दल को भी वहीं,विपक्षी देते रहते तनाव।।

जर जमीन जोरू के कारण है,परिवारों में भी तनाव।
धन संपत्ति महल अटारी,जागीर कारण बढ़े तनाव।।
कहीं सुकून में नहीं है कोई,झेलते रहते सभी तनाव।
भाग दौड़ का जीवन जीते,चेहरे पर है चिंता तनाव।।

ईश्वर जो दिया उसी में,सुख चैन संतोष का हो भाव।
आत्मशांति मुस्कान भरे चेहरे,वाला उन्नत स्वभाव।।
जीवन संगिनी हेतु जरूरी,कुछ पल हर्ष आनंदभाव।
ऐसे इन्साँ के जीवन में,न कोई तनाव न ही अभाव।।

बिन तनाव का ये जीवन,सर्वदा हितकर ही होता है।
इंसाँ जीवन में हो हमेशा वह,जो राम रचि होता है।।
स्वयं हाथ में कुछ न भइया,ईश निर्भर सब होता है।
प्रभु नाम जपो दिन-रात,जन्म व्यर्थ क्यों खोता है।।

ज्ञान विभूषण डॉ. विनय कुमार श्रीवास्तव
सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्रवक्ता-पी.बी.कालेज,प्रतापगढ़,उ.प्र.

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