साहित्य

मां दुर्गा स्तुति!

राजेश मृदुल

हे दुःख हरनी मंगल करनी दुर्गा मइया तेरी जय हो!
सबके सुख सपन सफल करनी दुर्गा मइया तेरी जय हो!

तेरे आंचल की छांव तले।
निर्भय हो यह संसार पले।
जन जन हित शुभ संबल करनी दुर्गा मइया तेरी जय हो!

दुविधा के बादल छंट जाते।
भवबंध जगत के कट जाते।
जीवन धारा अविरल करनी दुर्गा मइया तेरी जय हो!

अगणित हैं मइया नाम तेरे।
कण कण में अनगिन धाम तेरे।
विचरण नभ अतल वितल करनी दुर्गा मइया तेरी जय हो!

तुझको जो भी गोहराता है।
श्रद्धा के सुमन चढ़ाता है।
सौभाग्य उदय पल पल करनी दुर्गा मइया तेरी जय हो!

महिमा पावन जग गाता है।
संग संग मृदुल दोहराता है।
शुभ कर्म धर्म संदल करनी दुर्गा मइया तेरी जय हो!

स्वरचित/मौलिक
राजेश मृदुल
9140328015

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