
धुंध में डटी हुई वो एक ज्योति-सी चमक उठी,
देश के मान-सम्मान की जो पहली दीवार बनी खड़ी।
ग्यारह गोलियाँ खाकर भी जिसने पर्वत-सा साहस रखा,
वो कमलेश कुमारी हैं—भारत की धड़कन, भारत की अडिग लड़ी।
दिनेश पाल सिंह दिलकश
चन्दौसी जनपद संभल

धुंध में डटी हुई वो एक ज्योति-सी चमक उठी,
देश के मान-सम्मान की जो पहली दीवार बनी खड़ी।
ग्यारह गोलियाँ खाकर भी जिसने पर्वत-सा साहस रखा,
वो कमलेश कुमारी हैं—भारत की धड़कन, भारत की अडिग लड़ी।
दिनेश पाल सिंह दिलकश
चन्दौसी जनपद संभल