साहित्य

आदरणीया कमलेश कुमारी जी के सम्मान में एक मुक्तक

दिनेश पाल सिंह दिलकश

धुंध में डटी हुई वो एक ज्योति-सी चमक उठी,
देश के मान-सम्मान की जो पहली दीवार बनी खड़ी।
ग्यारह गोलियाँ खाकर भी जिसने पर्वत-सा साहस रखा,
वो कमलेश कुमारी हैं—भारत की धड़कन, भारत की अडिग लड़ी।

दिनेश पाल सिंह दिलकश
चन्दौसी जनपद संभल

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also
Close
Back to top button
error: Content is protected !!