
नवरात्रि में प्रथम दिन
शैलपुत्री का रूप
जिस माँ को भजते है
सभी श्रदा के अनुरूप।
मां शैलपुत्री का पार्वती जी
भी एक रूप है
इन नव दिनों में नौ माता गौरी
का सब स्वरूप है।
शोभित चंद्र शीश माँ के
श्र्वेत बना परिधान है
एक हाथ में त्रिशूल है
गौ माता सवारी है।
नारी शक्ति ,मातृ शक्ति के
ही धरे विभिन्न रूप है
करो पूजा तन मन से इनकी
ये हर नारी का स्वरूप है।
दीप जलाकर कर मन मंदिर
अपने घर में पूजा अर्चना करू
मन के सब पाप मिट जाये
तन मन से उनका ध्यान करू।
माँ सृष्टि की पालनहारी
अलग अलग सब रूप है
रूप,गुण, शक्ति, धैर्य ,क्षमता,
ज्ञान, करुणा और त्याग का रूप है।
मातारानी की चरणों में करे
सबमिलकर करे प्रणाम
हर भक्तो की बाधा दूर कर दो
सबका करो माँ कल्याण।
संगीता वर्मा
कानपुर उत्तर प्रदेश




