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महिला सशक्तीकरण व कार्यस्थल पर समावेशन पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित


अहरौला।राजकीय महिला महाविद्यालय समदी में अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर रविवार को कार्यस्थल पर महिलाओं का सशक्तीकरण और समावेशन के नारीवादी दृष्टिकोण पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन हुआ। प्राचार्य प्रो. महेन्द्र प्रकाश की अध्यक्षता में हाइब्रिड माध्यम में संगोष्ठी आईक्यूएसी द्वारा आयोजित की गयी। जिसमें आधिकारिक विचार क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी, आजमगढ़ डा. रमेश कुमार सिंह ने दिया और कहा कि महिला आधे समाज की प्रतिनिधि हैं, उनके लिए अवसर की उपलब्धता महत्वपूर्ण है। बतौर मुख्य आमंत्रित वक्ता बीएचयू के हिन्दी विभाग की प्रोफेसर उर्वशी गेहलोत, नगालैंड के दीमापुर राजकीय महाविद्यालय की डा. अमोंगला एन जमीर, मध्यप्रदेश के पीएमओसी माधव राजकीय महाविद्यालय, उज्जैन की डा. रीना, कालिदास राजकीय महिला पीजी कॉलेज, उज्जैन की अंजना बुंदेला रहीं। पैनल वक्ता उपाधि पीजी कॉलेज, पीलीभीत के प्रो. विपिन कुमार नीरज रहे। वक्ताओं ने महिला अधिकार, समानता, कार्यस्थल की समावेशी प्रकृति और सशक्तीकरण के समक्ष भारत व वैश्विक चुनौतियों पर प्रकाश डाला। संगोष्ठी समन्वयक डा. जमालुद्दीन अहमद ने मुख्य वक्ता और विशिष्ट वक्ताओं के साथ ऑनलाइन माध्यम से जुड़े विद्वानों और शोधार्थी छात्रों का स्वागत किया। मुख्य वक्ता प्रोफेसर उर्वशी ने कहा कि सावित्रीबाई फुले की कहानी हमें सशक्त प्रेरणा देती है कि प्रतिकूल परिस्थितियों में संघर्ष करना आवश्यक होता है। उन्होंने प्रगतिशील चिंतक सीमोन दी बोवा का उद्धरण देते हुए कहा कि स्त्री पैदा नहीं होती, बनाई जाती है। विशिष्ट वक्ता अमोंगला ने नगालैंड की महिला समस्या, उनकी कार्यशैली और संस्कृति पर बात रखते हुए हुए बताया कि महिला सशक्तीकरण और समावेशन में नगालैंड का प्रथम स्थान है। डा. रीना ने सामाजिक संरचना में सुधार की आवश्यकता पर बल देते हुए आर्थिक पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने बताया कि विभिन्न क्षेत्रों में अभी भी महिलाओं का योगदान लगभग चालीस प्रतिशत से कम है तथा पंचायत में महिलाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं है। जिसके लिए प्रशासनिक हस्तक्षेप की जरूरत है। डा. अंजना बुंदेला ने बताया कि कानून बनाना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि शिक्षा की उन्नति और निर्णय की स्वतंत्रता से समावेशी संस्कृति का विकास करना ही नारी सशक्तीकरण के पहलू हैं। संगोष्ठी के शोध पत्र प्रस्तुतीकरण सत्र में शोधार्थियों और विद्वान आचार्यों ने अपने शोध पत्रों का वाचन किया, जिसमें डा. क्रांति कुमार त्रिवेदी, डा. सुधा जायसवाल, डा. जयप्रकाश नारायण यादव, डा. अनीता जायसवाल, डा. नेहा मिश्रा, डा. प्रज्ञानन्द प्रजापति, डा. अमित कुमार गोंड ने कार्यस्थल पर नारी के समस्त वर्ग के समावेशन की संस्कृति को विकसित करने पर बल दिया। आयोजन सचिव डा. राकेश कुमार यादव ने सभी प्रतिभागियों व प्राध्यापकों का धन्यवाद ज्ञापन किया।

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