
नवसंवत में मंगल मंगल
हे प्रभु रखना सबका मंगल
हर पल सबका मंगल मंगल
प्रभु जी रखना सबका मंगल
बीत गया वो भी था मंगल
बीत रहा है वो भी मंगल
हर गलती की माफी मंगल
क्षमा दया की माँग सुमंगल
प्रेम भाव का सार सुमंगल
दुखे न दिल रख याद सुमंगल
ईर्ष्या द्वेष मिटे जग मंगल
आपस का व्यवहार सुमंगल
धर्म कर्म का सार सुमंगल
शिशु माता का हो शुभ मंगल
ज्ञान करे बच्चों का मंगल
मातु पिता संतान सुमंगल
नारी का सौभाग्य सुमंगल
वयोवृद्ध का स्वास्थ्य सुमंगल
श्रद्धा और संस्कार सुमंगल
सब का हो पद भार सुमंगल
आमद की हर राह सुमंगल
युवाओं का मार्ग सुमंगल
जवां दिलों की सोच सुमंगल
हर रिश्तों में भाव सुमंगल
त्योहारों की रौनक मंगल
धरती और आकाश सुमंगल
भारत माँ का आंचल मंगल
वीर सपूतों का हो मंगल
हरित धरा हर जंगल मंगल
कण – कण जीव चराचर मंगल
पति देव का स्नेह सुमंगल
सखियों की खुशियाँ हो मंगल
हम सब का हर दिन हो मंगल
कविता का संसार सुमंगल
कलम भाव हों सदा सुमंगल
याद रहे उन सब का मंगल
जो भूले उनका भी मंगल
साथ रहे उनका हो मंगल
जो छूटे उनका भी मंगल
प्यार किए उनका हो मंगल
घाव दिए उनका भी मंगल
अंत भला जग भला सुमंगल
हे प्रभु करना सबका मंगल
नीलम अग्रवाल “रत्न” बैंगलोर
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