
तेरी हर अदा में कोई नज़ाकत सी है,
जैसे कली में छुपी कोई आहट सी है।
तेरी चाल में जैसे लहरों की रवानी,
तेरी मुस्कान में कोई शरारत सी है।
जब तू पास से गुज़रती है हौले-हौले,
हवा में भी मीठी सी खुशबू रहती है।
तेरी बातों की कोमल सी मिठास,
दिल में कोई धुन सी कहती है।
तेरी आँखों की वो झुकी हुई लाज,
दिल को चुपके से छू जाती है।
तेरे चेहरे की मासूम सी चमक,
हर धड़कन को महका जाती है।
तेरी नज़ाकत का क्या बयाँ करूँ,
शब्द भी अक्सर कम पड़ जाते हैं।
तुझे देखते ही दिल के मौसम,
खुद-ब-खुद बहार बन जाते हैं।
अतुल पाठक
हाथरस(उत्तर प्रदेश)




