साहित्य

दिल की आरजू

उदय किशोर साह

मचल रहा है मेरे दिल की  आरजू
गीत मिलन की गाओ री   कलियाँ
अय चंचल अल्हड़ उड़ती      हवा
पैरों में बाँध छनकाओ   पायलिया

अमुवा की डाली पे कोयलिया काली
कुहू कूहू  गाती है  प्रीत की पिरितिया
चकोर भी पूनम की चाँद की चाँदनी में
भूला गई सुध बुध सारी बीती वो रतिया.

रे पपीहा तुँ भी बात कर मना ले अपनी
रूठा जो तेरा मन की प्रेमी   पड़ोसिया
कहो आवाज लगाओ तुँ उनको     अब
कहाँ छुपा है    गुमनाम बैरी  रंग रसिया

गिले शिकवे को कह दो आज अलविदा
मेरे दर पे ना कभी आने वो  कभी   पाये
मेरी पर्ण कुटी रूपी आशियाना         में
गम की जादू ना दिखला कर अब   जाये

ना जाने कौन सा पल हो जाये  कयामत
ना जाने कौन सी आनी है कोई    आफत
चलो भूल जाये जो कल     तक बीता  था
खो जाना है एक दूजै में दिखा कर शराफत

उदय किशोर साह
मो० पो० जयपुर जिला बांका बिहार

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