
दिल में वो प्यार से समाए हैं
पर नज़र क्यों नहीं वो आए हैं
उनकी बंशी की धुन हमें सुनती
तान मीठी हमें सुहाए हैं
श्याम चरणों में मन लगा जबसे
शांति अंतस बहुत ही भाए हैं
रूठना उनका हक था मुझसे
प्यार से हम उन्हें मनाए हैं
हक हमारा हमें दो ये कहकर
जंग छेड़ी बहुत सुनाए हैं
उनसे मिलना कभी नहीं हुआ
पर उषा ने तो नग्में गाए हैं
डॉ उषा अग्रवाल जलकिरण
छतरपुर मध्यप्रदेश




