साहित्य

साहित्य को भी पढ़ लो दोस्तो

कुलदीप सिंह रुहेला

साहित्य को भी पढ़ लो दोस्तों,ये जीवन का आईना है,
हर शब्द में छिपा हुआ एक सागर-सा नगीना है।

कभी हँसी की झंकार बने, कभी आँसू की धारा है,
साहित्य ही तो दिल की गहराई का सच्चा इशारा है।

अक्षरों की ये माला देखो, मोती-सी सज जाती है,
भावों की हर एक लहर दिल में उतर सी जाती है।

कबीर की साखी बोले, तुलसी की चौपाई गाए,
मीरा का प्रेम पुकारे, सूर का रस बरसाए।

हर पन्ने में जीवन की सच्चाई झलकती है,
छोटी-सी एक पंक्ति भी दुनिया बदल सकती है।

हिंदी की मधुर ध्वनि से दिल में उजियारा लाओ,
अपने शब्दों के दीपक से जग को रोशन बनाओ।

साहित्य की बारीकी को समझो,ये अनमोल खजाना है,
हर युग में जिसने इंसान को इंसान बनाना है।

आओ मिलकर कसम ये खाएं,हिंदी को आगे बढ़ाएंगे,
गीत, कविता और कहानियों से जग में रंग सजाएंगे।

कुलदीप सिंह रुहेला
सहारनपुर उत्तर प्रदेश

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