साहित्य

शहीदी दिवस

प्रिया काम्बोज प्रिया

 

खुशनसीब हूं मैं ,जो मैंने ये दिन पाया है
भगतसिंह, राजगुरु, सुखदेव का शहीदी दिवस आज आया है
कुर्बान कर गये वो खुद को उस वतन के लिए
जिस माटी में जनम लिया उसका कर्ज चुकाया है
मेरा भी लहू आज उसी वतन के काम आया है
सार्थक होगा जीवन मेरा तब ही जब किसी
उजड़ती मां की गोद में फिर से उसका लाल मुस्कुराया है
अपने वतन के लिए जिस लाल ने खून अपना बहाया हैं
तमन्ना है बस इतनी,मेरे लहू का कतरा कतरा काम आए
मिले उस वीर को जिसने अपना जीवन मातृभूमि के लिए लुटाया है ।।

 

प्रिया काम्बोज प्रिया ✍🏻 स्वरचित

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