साहित्य

आशायें और सपने

डॉ कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’

आशाओं, सपनों का हर दिन
जीवन में एक नया दिन होता है,
इनकी पूरी कोशिश करते रहिये,
सपनों को मन में संजोये तो रखिये।

आशायें, सपने तो जीवन का
उत्साह दिन रात बढ़ाते रहते हैं,
उत्साह में प्रचुर शक्ति होती है,
प्रतिपल उत्साही बनकर रहिए।

दुनिया में उत्साह और प्रोत्साहन
आपदा में भी अवसर बन जाते हैं,
ऐसे ही उत्साही बनकर आगे बढ़िए,
संसार के दुर्लभ फल मिल जाते हैं।

जब तक इंसान के मन में सपने हैं,
आशायें प्रतिदिन जागृत होंगी,
जब तक आशायें जागृत होंगी,
जीवन में आनंदानुभूति भी होगी।

ख़ुशियों की चाभी भी अक्सर
सपनों से ही मिल पाती है,
और सफलता की चाभी से
सपने प्रायः सच हो जाते हैं।

मन की तृष्णा से प्यासे रहकर,
आनंद की प्यास बुझाते रहिए,
आदित्य आशाओं एवं सपनों से
जीवन भर साथ निभाते रहिये।

डॉ कर्नल आदिशंकर मिश्र
‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’
लखनऊ

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