साहित्य

गणतंत्र दिवस

पूनम त्रिपाठी

वीरों की कुर्बानी से
सजी है ये कहानी,
हर कण में बसती है
भारत की निशानी।
संविधान ने दिया हमको अधिकारों का मान,
कर्तव्यों से ही ऊँचा होता है देश का सम्मान।
न कोई छोटा, न कोई बड़ा यहाँ कहलाए,
गणतंत्र हर नागरिक को बराबर का बनाए।
वोट की ताक़त से जनता बोले अपनी बात,
लोकतंत्र में ही मिलती है सच्ची सच्ची सौगात।
तिरंगे की शान में लिपटी है हर एक सांस,
देशभक्ति से रोशन हर दिल, हर विश्वास।
आओ मिलकर लें ये संकल्प आज के दिन,
भारत को बनाएं सशक्त, समृद्ध और नवीन।
पूनम त्रिपाठी
गोरखपुर ✍️

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