स्वाभिमान साहित्यिक परिवार का ‘स्पेशल होली गीत’ वीडियो यूट्यूब पर प्रसारित: रंगों और साहित्य का अद्भुत संगम
दुर्गेश मोहन

पटियाला।रंगों के उल्लासपूर्ण पर्व होली के अवसर पर, स्वाभिमान साहित्यिक परिवार ने एक अनूठा और मनमोहक वीडियो ‘स्पेशल होली गीत’ यूट्यूब पर प्रसारित किया है। यह वीडियो साहित्यिक रचनात्मकता, संगीत की मधुरता और होली के पारंपरिक उत्साह का एक शानदार मिश्रण है, जिसे नरेश कुमार आष्टा ने अपनी होली रस से भरपूर पिचकारी की धुनों से सजाया है। यह विशेष प्रस्तुति श्रोताओं को झूमने और होली के रंगों में सराबोर होने पर मजबूर कर देगी।
इस साहित्यिक और संगीतमय यात्रा में देश के विभिन्न कोनों से प्रतिष्ठित कलमकारों ने अपनी रंगीन कविताओं और गीतों का योगदान दिया है, जो इस वीडियो को और भी विशेष बनाते हैं:
प्रो. नव संगीत सिंह (पटियाला, पंजाब): अपनी ओजस्वी वाणी में इन्होंने पंजाबी साहित्य, जीवंत रंगों और बाजारों की चहल-पहल का वर्णन किया है, जिससे दर्शक ढोल की थाप पर पंजाबी भांगड़ा करने के लिए उनके गीत ‘होली का त्योहार ‘ पर विवश हो उठेंगे।
भीम सिंह ‘साथी’ (दिल्ली): शरद ऋतु के शांत सौंदर्य और वसंत बहार की ताजगी के बाद, इन्होंने होली के रंगों को खुले दिल से अपनाया है और अपने गीतों के माध्यम से ‘हमें आपकी होली कबूल है’ का संदेश दिया है।
सोनल मंजू श्री ओमर (राजकोट): अपनी जोशीली प्रस्तुति से ये ‘होली का हुड़दंग’ मचाने आ रही हैं, जिससे माहौल और भी जीवंत हो उठेगा।
सिद्धेश्वर (पटना): ‘आसमान के नीचे सभी को एक साथ’ लाने और ‘होली का रंग’ लगाने के अपने आह्वान के साथ, वे एकता और सौहार्द का संदेश दे रहे हैं।
डॉ. अनुज प्रभात (अररिया): इनकी प्रस्तुति ‘दिल से दिलों का रंग’ लगाने का एक भावनात्मक अनुभव प्रदान करेगी, जो रिश्तों की गहराई को उजागर करेगी।
रेखा किंगर रौशनी (मुंबई): ‘मतवाले फागुन में होली’ के गीत के साथ, ये राधा-कृष्ण के शाश्वत प्रेम और उनकी होली लीलाओं को जीवंत कर रही हैं।
जागृति गौड़ (पटियाला, पंजाब): परंपरा और विरासत के धागे बुनते हुए, ये ‘होली की कहानी’ सुनाने आ रही हैं, जो इस पर्व के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को दर्शाएगी।
संतोष पुरी (नई दिल्ली): परिवार और समाज में व्याप्त भेदभाव को दूर करने के उद्देश्य से, इनकी प्रस्तुति ‘होली आई रे, होली आई रे’ का उद्घोष करती है, जो सभी को एक साथ आने और खुशियां बांटने के लिए प्रेरित करती है।
प्रस्तुति _दुर्गेश मोहन
बिहटा, पटना (बिहार)




