साहित्य

ट्रंप झुकता नही है… हास्य-व्यंग्य

जयचन्द प्रजापति 'जय'

ट्रंप एक न झुकने वाला फलदार वृक्ष है। जो कभी झुकता ही नहीं। चाहे जितने फल आ जाये उसकी हर डाली पर लेकिन वह झुकता नही। आंधी तूफान भी कुछ नहीं कर सकता है। ये सब ट्रंप के लिए बस हवा के झोंके है।

वह इतना ताकतवर है कि कीड़े मकोड़े उसके उपर से गुजर जाये लेकिन कोई उसकी लम्बाई का कद छोटा नहीं कर सकता है। जो इस विशालकाय वट वृक्ष से टक्कर लेने की कोशिश करता है। वह चकनाचूर हो जाता है। उसकी दाल ही नहीं गल पाती है।

विशाल चट्टान की तरह अडिग है। बम, बारुद उसकी नाक की साख है। कह लीजिए कि वह एक विशालकाय ऊंट से कम नहीं होता है। जिधर करवटें लेता है। कीड़े-मकोड़े वाले देश कराह उठते हैं। वह खूब हंसता है जब दुनिया का नुकसान देखता है। उसे अपनी परवाह होती है दूसरे की नहीं।

यहाँ तक बडे़-बडे़ कवियो की कविताएँ भी नहीं झुका सकी। कवितायें झुक गयी। उसके आगे विनम्र हो गयी। उसका तलवा चाटने लगी। उसमें एक भी अंश झुकाव नहीं उत्पन्न हो सका। कवितायें भी नतमस्तक हो गयी। लेकिन वह छाती चौड़ा किये ठहाके लगा रहा है।

तरह-तरह की उपासना की जाने लगी। हार माला पहनाया गया। फिर भी नहीं झुका। उदारता उसके मन भावों को टटोला। वह बेचारा तभी झुकता है‌। जब कोई गिड़गिड़ाता है। उसके आगे झुक जाता है। तब उसका ह्रदय गदगद हो जाता है। वह भी अकड़ के साथ झुक जाता है।

…..
जयचन्द प्रजापति ‘जय’
प्रयागराज

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also
Close
Back to top button
error: Content is protected !!