साहित्य

यादों की पोटली

सुमन बिष्ट

ज़िंदगी के पल यूँ ही गुजर जाते हैं,
समय की धारा में अक्सर बिखर जाते हैं।
जो ठहर कर उन्हें समेट लेता है,
वही जीवन के असली रंग देख लेता है।

कभी डायरी के पन्नों पर उतरती है कहानी,
कभी शब्दों में मुस्कुराती है बीती निशानी।
दिनभर की यादों को जब काग़ज़ मिलता है,
तब हर छोटी याद भी अमर बन जाती है।

कभी तस्वीरों में कैद हो जाती है हँसी,
कभी वीडियो में ठहर जाती है वह खुशी।
एक पल जो कैमरे में थम जाता है,
वह सालों बाद भी दिल को महका जाता है।

कभी कोई छोटा-सा स्मृति चिन्ह,
किसी मुलाक़ात की खुशबू सँजोए रहता है।
एक उपहार, एक काग़ज़, एक पुरानी चीज़,
बीते लम्हों का आईना बन जाता है।

कभी बैठकर यादों को दोहराना भी ज़रूरी है,
उन पलों को फिर से जीना भी ज़रूरी है।
सोच के दीप जलते हैं जब मन के भीतर,
तब यादों की रोशनी और गहरी हो जाती है।

और जब मन शांति से सोचता है,
तब हर याद दिल के पास आ जाती है।
और समझ आता है,
ज़िंदगी पल-पल में छिपी एक कहानी है,
जिसे सहेजना ही सबसे बड़ी निशानी है।

स्वरचित मौलिक रचना
सुमन बिष्ट, नोएडा

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