साहित्य

युद्ध

विनोद कुमार सीताराम दुबे

मानव और विज्ञान का
संघर्ष आज चरम पर है
प्रथम विश्व युद्ध में देखा
मानव की बिनाश लिला
द्वितीय विश्व युद्ध में देखा
मानव जीवन का बिनाश
तहस-नहस संसार हुआ
चहुंओर हाहाकार मचा
विज्ञान के अस्त्र-शस्त्र ने
मानव का शंघार किया
आज चल रहे युद्ध को
सभी मिलकर रोको मित्रों
आधुनिक तकनीक से बने
आज के वैज्ञानिक अस्त्र-शस्त्र
मानव को समाप्त कर देंगे
धरती मानव विहिन हो जायेगी
आओ हम-सब मिलकर मित्रों
इस युद्ध को रोकने का प्रयास करें
भाईचारा मानवता का पाठ पढ़ाएं
द्ववेश भाव से दूर हटकर प्यारे मित्रो
मानव में मानव के प्रति प्रेम जगाएं
युद्ध नहीं चाहते आओ हाथ मिलाएं

विनोद कुमार सीताराम दुबे शिक्षक भांडुप मुंबई महाराष्ट्र
संस्थापक इन्द्रजीत पुस्तकालय सीताराम ग्रामीण साहित्य परिषद सामवन्ती ग्राम महिला विकास मंडल जुडपुर मड़ियाहूं जौनपुर उत्तर प्रदेश

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