
पोता बोला दादा जी से
हूँ बहुत बड़ी उलझन में,
कौन यहाँ बाॅंधेगा घंटी
इस बिल्ली की गर्दन में ।
मेरे तो कुछ समझ न आता
यह मुझको तुम समझाओ,
क्या मतलब होता है इसका
दादा जी मुझे बताओ।
कठिन काम जब कोई होता
वह नहीं किसी को भाता,
करने से पहले ही उसके
है दूर भाग वह जाता।
तभी लोग कहते हैं मिलकर
वहाँ देख सभी को मौन,
बिल्ली की गर्दन में तो अब
यहाँ घंटी बाॅंधे कौन।
मुकेश कुमार दीक्षित ‘शिवांश’
चंदोसी
मो०-8433013409
दिनांक – 15-1-2026




