
ज़िंदगी भी किसी परीक्षा से कम नहीं,
हर सुबह एक नया प्रश्न सामने रख देती है।
कहीं विकल्प होते हैं ,सही या सरल के बीच,
तो कहीं बिना विकल्प के उत्तर माँग लेती है।
यहाँ समय ही परीक्षक है,
जो न अतिरिक्त समय देता है, न दुबारा मौका।
गलतियाँ उत्तर-पुस्तिका में नहीं कटतीं,
सीधे अनुभव बनकर जीवन में जुड़ जाती हैं।
कुछ प्रश्न रिश्तों के होते हैं
जहाँ समझदारी से लिखना पड़ता है उत्तर।
कुछ प्रश्न संघर्ष के
जहाँ आँसू स्याही बन जाते हैं।
जो धैर्य से हर प्रश्न हल करता चलता है,
वही अंत में सफल कहलाता है।
क्योंकि इस प्रश्न-पत्र में अंकों से अधिक
इंसानियत और साहस का मूल्य आँका जाता है।
ज़िंदगी का प्रश्न-पत्र कठिन जरूर है,
पर उत्तर लिखने का साहस हमारे भीतर है।
जो सीखते हुए आगे बढ़ जाए,
वही जीवन की परीक्षा में उत्तीर्ण है।
©® डॉ सारिका ठाकुर ‘जागृति’
ग्वालियर ( मध्य प्रदेश )



