
धरा नित्य शोभे सुहाना वसंत।
लुभाता लगे दिव्य सारा दिगंत॥
सुहानी घड़ी है हवा मंद मौन।
पसीना सुखाये खड़ा है सरौन॥
हुआ भोर पंछी सुनाये सुगान।
बहे नित्य धारा नदी मध्य मान॥
उठो नित्य प्रातः बनोगे सुजान।
धरो धैर्य भ्राता करो भक्ति गान॥
गिरी मेखला मौन ताने मचान।
दिवा रौशनी नित्य दैदीप्यमान॥
घटा श्याम नीली दिखे आसमान।
पपीहा पुकारे करे नित्य गान॥
करो कर्म सच्चा सदा सत्य भाव।
सदा सत्य बोलो यही है सुझाव॥
करो मात रक्षा रखूँ भक्ति भाव।
तुम्हीं मात रक्षा करो चित्त चाव॥
महादेव पूजा करूँ नाथ आज।
भजूँ नित्य देवा रखो आज लाज॥
करूँ आरती नित्य स्वामी महान।
जपूँ नित्य देवा बना दो सुजान॥
© डॉ॰ अर्जुन गुप्ता ‘गुंजन’
प्रयागराज, उत्तर प्रदेश



