
मालवीय जी ने अक्षर को तप की धार दिया
ज्ञान को राष्ट्र यज्ञ का आधार दिया.
शिक्षा उनके लिए व्यापार नहीं साधना थी
काशी से भारत को संस्कार संसार दिया.
ग्रंथों में उन्होंने भविष्य की रेखा देखी
युवाओं के मन को स्वाभिमान का सार दिया.
विश्वविद्यालय नहीं चरित्र गढ़े उन्होंने
पीढ़ियों को चेतना का उपहार दिया.
फिर अटल जी आए वाणी में विश्वास लिए
कविता को संसद का अधिकार दिया.
राजनीति को उन्होंने मर्यादा सौंपी
मतभेद में भी संवाद का व्यवहार दिया.
न झुके न टूटे न कटुता को जगह मिली
सत्य को सरल और साहस को आकार दिया.
एक ने सोच को दीपित करना सिखाया
एक ने शब्दों को राष्ट्र का अवतार दिया.
और भारत ने इन दोनों से अपने कल को अर्थ
और अपने आज को पहचान दिया.
महेजबीन मेहमूद राजानी
सड़क अर्जुनी/ महाराष्ट्र
9423415191




