साहित्य

सरस्वती वन्दना

सुमन बिष्ट

माँ सरस्वती,तुम ज्ञान की ज्योति,
अज्ञान तम तुम हर लो माँ।
बुद्धि-विवेक की दिव्य किरण से,
जीवन जगमग कर दो माँ॥

हंस सवारी, श्वेत वसना,
पावन रूप तुम्हारा है माँ।
सत्य-धर्म के पथ पर चलना,
कृपा कर, हमें सिखा दो माँ॥

तेरी वीणा की तान सुहानी,
मन को शुद्ध बनाती माँ।
पढ़ने-लिखने की लगन जगा कर,
आगे बढ़ना सिखाती माँ॥

तेरे हाथों में ग्रंथ सुशोभित,
विद्या का वरदान है माँ।
मेहनती और अनुशासन प्रिय को,
श्रेष्ठ इंसान बनाती है माँ॥

वाणी को मेरी,मधुर बना दो,
विचार सदा पवित्र रहें मेरे माँ।
क्रोध,द्वेष,आलस सब तुम हर के,
नव सृजन के बीज उगा दो माँ॥

गुरुजनों का मान सिखाओ,
मित्रों से हो सबको प्यार माँ।
सेवा-भाव, स्नेह ह्रदय में भर दो ,
अपने बच्चों का संसार माँ॥

सपनों को दो उच्ची उड़ानें,
हौसलों को नये पंख दो माँ।
ज्ञान-दीप से आलोकित कर दो,
हम बच्चों का ये संसार माँ॥

माँ शारदे हम वंदन करते,
तेरे सम्मुख शीश नवाएँ माँ।
ज्ञान-पथ पर चलकर हम सारे,
अपने देश का मान बढ़ाएँगे माँ॥

सुमन बिष्ट, नोएडा

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