
आज खुला है बैंक निराला,
नाम है इसका “हँसी का ताला”।
नोट नहीं, यहाँ ठहाके चलते,
मूर्ख दिवस पर सब खाते खुलते।
कैशियर बोला – “लाइन में आओ,
पहले अपनी हँसी दिखलाओ”।
ग्राहक बोला – “हँसी नहीं है पास”
कैशियर हँसा – “तो तुम ही हो खास”।
एक मैडम आईं बड़ी सजे -धजे ,
बोलीं – “हँसी चाहिए और थोड़े मज़े”
क्लर्क बोला – “सेल चल रही है आज,
दो हँसी लो, तीसरी फ्री है आज”
छोटा बच्चा आया रोता-रोता,
कहा – “चाहिए हँसी का कोटा”
कैशियर बोला – “लो यह हँसी का लोन,
चुकाना नहीं, बस हँसना फुल ऑन”
यहाँ जमा हैं चुटकुले भारी,
निकासी में मिलती खिलखिलाहट सारी।
ब्याज में मिलती है मुस्कान,
हर ग्राहक बन जाता है महान।
मूर्ख दिवस का यह बैंक अनोखा,
नीरस दिल को कर दे चोखा।
तो आज ही खाता खुलवा लो भाई,
हँसी से बड़ी न कोई कमाई…..।।
🍁वीणा अब्राहम सिंह🍁


