हम सब भारतीय अब रहते यहां अंग्रेज नहीं
ये भी नहीं कहता इंग्लिश का कोई क्रेज नहीं
फोन मिलाओ अगर करते हो प्यार किसी को
1 जनवरी का मैसेज अब किसी को भेज नहीं
एक अप्रैल से कर नए वर्ष की शुरुआत यहां
इंग्लिश के नए साल से करते क्यों गुरेज नहीं
नया साल कैसे हैं यह आज बताओ मुझको
पतझड़, कोहरा है सूरज में भी वह तेज नहीं
हिंदी महीनों के नाम नई पीढ़ी कैसे बताएगी
अंग्रेजी के नए साल से करते क्यों परहेज नहीं
हम खुद ही भूल गए दूसरों को क्या बताएंगे
नई पीढ़ी को जब हम देते कोई संदेश नहीं
जो दिखता वही बिकता है कहावत सच्ची है
हिंदी वाले महीनों की होती यहां कवरेज नहीं
पंडित पुष्पराज धीमान भुलक्कड़
गांव नसीरपुर कलां हरिद्वार




