माता – भू की है उतारें,
जन -मन मिलकर आरती।
देवभूमि की है उतारें,
सारे मिलकर ,आरती।।
मन थाल सजाकर आरती,
धूप जलाकर आरती।।
दीप जलाकर आरती।
फूल चढ़ाकर आरती।।
देवभूमि की है उतारें,
सारे मिलकर ,आरती।।01
छिपे रत्न तेरे गर्भ में, महके तुझ से जग चमन।
करते भारतवासी तुझे , कोटि – कोटि मन से नमन ।।
जन्मे ऋषि – मुनि हैं रत्न नर ,
करते आलोक भू पर।
अतिथि अजनबी को मानकर,
गले लगाती भारती।।
देवभूमि की है उतारें,
सारे मिलकर ,आरती।
भक्ति भाव से कर आरती ,
श्रद्धानत कर आरती।
हार चढ़ा कर आरती,
हाथ जोड़ कर आरती।।
देव भूमि की हैं उतारें,
सारे मिलकर आरती।।02सनातनी संस्कृति सँजोकर,
सँभाल के रखना इसे।
पूर्वज का है अनुसरण कर,
समृद्ध है करना इसे।
इसकी राह हर जन चलकर,
जग का गुरु बनना इसे।।
लेते हैं प्रण तेरे लिए,
सारे मिलकर भारती। 03
डॉ मंजु गुप्ता
वाशी , नवी मुंबई।



