बिहार

संघर्ष से सफलता तक की प्रेरक यात्रा: लाखों युवाओं के मार्गदर्शक बने आदित्य रंजन

"गरीबी को बाधा नहीं, प्रेरणा बनाकर शिक्षा के क्षेत्र में नई मिसाल कायम करने वाले व्यक्तित्व हैं आदित्य रंजन जी।"

 

बेतिया, बिहार। कुछ व्यक्तित्व अपनी सफलता के कारण नहीं, बल्कि अपने संघर्ष, समर्पण और समाज के प्रति उत्तरदायित्व के कारण विशेष पहचान बनाते हैं। ऐसे ही प्रेरणादायी व्यक्तित्व हैं आदित्य रंजन, जिन्होंने आर्थिक अभावों और कठिन परिस्थितियों से निकलकर न केवल सरकारी सेवा में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की, बल्कि लाखों प्रतियोगी विद्यार्थियों के लिए आशा और विश्वास का केंद्र भी बन गए।

बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के बेतिया के एक साधारण किसान परिवार में जन्मे आदित्य रंजन के पिता श्री अखिलेश प्रसाद ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने पुत्र की शिक्षा में कोई कमी नहीं आने दी। गाँव से दसवीं तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे राँची के ऑक्सफोर्ड पब्लिक स्कूल पहुँचे। आर्थिक कठिनाइयों के बीच उन्होंने ग्यारहवीं और बारहवीं की पढ़ाई के दौरान होम ट्यूशन पढ़ाकर अपने रहने और पढ़ाई का खर्च स्वयं उठाया।

संघर्ष का यह सिलसिला यहीं नहीं रुका। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए वे दिल्ली पहुँचे, जहाँ एक छोटे से किराए के कमरे में वर्षों तक अभावों के बीच रहकर पढ़ाई की। कई बार पैसों की कमी के कारण उन्हें लंबी दूरी पैदल तय करनी पड़ी। कोरोना महामारी के दौरान आर्थिक संकट इतना गहरा गया कि भोजन तक की समस्या उत्पन्न हो गई, लेकिन उन्होंने परिस्थितियों के सामने हार नहीं मानी और निरंतर अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहे।

उनकी कठिन मेहनत का परिणाम तब सामने आया जब उन्होंने SSC CGL के माध्यम से Excise Inspector का पद प्राप्त किया। इसके अतिरिक्त SSC CHSL में ऑल इंडिया रैंक 114 हासिल की तथा गणित, अंग्रेज़ी और रीजनिंग जैसे विषयों में प्रारंभिक परीक्षा में पूर्ण अंक प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।

सरकारी सेवा में चयन के बाद भी उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र से अपना जुड़ाव बनाए रखा। उन्होंने यूट्यूब के माध्यम से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने का कार्य शुरू किया। सीमित संसाधनों से आरंभ हुई यह पहल आज लाखों विद्यार्थियों के लिए सफलता का माध्यम बन चुकी है। उनके मार्गदर्शन में अनेक अभ्यर्थियों ने विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्कृष्ट स्थान प्राप्त किया है। उनकी तैयार की गई फॉर्मूला बुक भी प्रतियोगी छात्रों के बीच अत्यंत लोकप्रिय और उपयोगी मानी जाती है।

इसी शिक्षा-सेवा की भावना को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने ‘विद्याग्राम’ की स्थापना की, जिसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को कम शुल्क में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। आज विद्याग्राम हजारों-लाखों युवाओं के सपनों को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

बिहार राज्य के मुजफ्फरपुर जिले के साधारण विद्यार्थी कुमार संदीप ने इनकी जीवनी लिखते हुए कहा है कि आदित्य रंजन जी का जीवन इस बात का प्रमाण है कि यदि संकल्प दृढ़ हो, परिश्रम निरंतर हो और माता-पिता का आशीर्वाद साथ हो, तो कोई भी कठिनाई सफलता के मार्ग में बाधा नहीं बन सकती। आज वे केवल एक सफल अधिकारी या शिक्षक ही नहीं, बल्कि संघर्ष, अनुशासन और शिक्षा-सेवा के सशक्त प्रतीक के रूप में देशभर के युवाओं को प्रेरित कर रहे हैं।

Kumar Sandeep

बिहार राज्य के मुजफ्फरपुर जिला अंतर्गत सिमरा गांव का एक सामान्य परिवार में जन्मा एक युवा साहित्यकार, विद्यार्थियों का गुरू, व अपने अभिभावक का संस्कारी संतान।

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