
संविधान जान से प्यारा है,जीने का हसीं सहारा है।
ना करे ज्यादती कभी किसी पर,सबका पालनहारा है।।
संविधान जान से प्यारा है,जीने का हसीं सहारा है।।
छ: दिये मूल अधिकार हमें ,ग्यारह कर्तव्य बतलाता है।
निर्देशक-नीति के तत्व मिले ,जीवन को हसीं बनाता है।।
सर्वोच्च न्याय की शक्ति से, दुखियों का तारणहारा।
संविधान जान से प्यारा है,जीने का हसीं सहारा है।।
अनुच्छेद बने तीन सौ पिच्यानवें, बारह परिशिष्ट सजाये।
अनुसूची आठ लगें सुन्दर ,उद्देशिका में प्राण बसाये।।
कहीं लचीला कहीं बना कठोर,सब देशों से न्यारा है।
संविधान जान से प्यारा है,जीने का हसीं सहारा है।।
प्रारूप दिया बाबा साहेब ने,राजेन्द्र ने की सार सम्भाल।
दो वर्ष ,माह ग्यारा,दिन अट्ठारा,अधिवेशन ग्यारह का मचा धमाल।।
बन गया सुखद जीवन सबका जब से इसको स्वीकारा है।
संविधान जान से प्यारा है,जीने का हसीं सहारा है।।
मार पड़ी संशोधन की,अब कैसे ये सह पायेगा।
अस्तित्व आ गया खतरे में,कैसे अब ये बच पायेगा।।
रखें इसे हर हाल में जिन्दा,बाबा साहब का नारा है।
संविधान जान से प्यारा है,जीने का हसीं सहारा है।।
संविधान जान से प्यारा है,जीने का हसीं सहारा है।
ना करे ज्यादती कभी किसी पर,सबका पालनहारा है।।
संविधान जान से प्यारा है,जीने का हसीं सहारा है।
✍️ सुन्दर लाल मेहरानियाँ




