
विक्रमादित्य ने उज्जैन,साम्राज्य की शोभा बढ़ाया।
शकों को हराकर भारत देश में,एक धाक जमाया।।
वो काल ही भारत का,स्वर्णिम काल कहा जाता है।
नृप विक्रमादित्य को है,महान राजा कहा जाता है।।
विक्रमादित्य काल में,भारत से वस्त्र विदेशी लेते थे।
व्यापारी सोने के बिस्कुटों से,तौल कर खरीदते थे।।
भारत में उसी समय बहुत,ज्यादा सोना हो गया था।
विक्रमादित्य के राज में ये,स्वर्ण भंडार हो गया था।।
विक्रमादित्य के समय,स्वर्ण के ही सिक्के चलते थे।
छोटे बड़े हर प्रकार में,सोने के ये सिक्के चलते थे।।
आप गूगल पर जा कर,उसकी इमेज देख सकते हैं।
विक्रमादित्य के यह सोने के,सिक्के देख सकते हैं।।
वार्षिक पंचाग में जो,विक्रम संवत लिखा जाता है।
महाराजा विक्रमादित्य द्वारा,यह स्थापित हुआ है।।
आज जो भी ज्योतिष गणना है जैसे हिन्दी सम्वंत।
वार तिथि राशि नक्षत्र गोचर सब उनकी रचना है।।
बेताल पच्चीसी-विक्रम,मशहूर पच्चीस कहानियाँ।
सिंहासन बत्तीसी भी,विक्रमादित्य की कहानियाँ।।
57 ईसा पूर्व-19 ईस्वी तक वह भारतीय सम्राट थे।
विक्रमादित्य को’विक्रमसेन’नाम से भी जानते थे।।
इनके शासन साम्राज्य की,है राजधानी उज्जैन थी।
भारत की एक शक्तिशाली,विशाल राजधानी थी।।
वह बड़े पराक्रमी बलशाली एवं बुद्धिमान राजा थे।
कईबार देवता भी उनसे,ये न्याय करवाने आते थे।।
विक्रमादित्य काल में हरेक,नियम धर्मशास्त्र से था।
नियम बनाया था न्याय-राज,सब धर्मशास्त्र से था।।
नियमों से ही उस समय,धर्मानुसार राज चलता था।
विक्रमादित्य का काल ये,भगवान राम के बाद था।।
सर्वश्रेष्ठ काल था ये जहाँ,उनकी प्रजा भी धनी थी।
समस्त राज्यवासी केवल,धर्म पर चलने वाली थी।।
महाराजा विक्रमादित्य के,बारे में कितना भी लिखें।
शब्द कमी पड़ जाएगी,महानता लिखते रहें लिखें।।
बड़े दुःख की बात है कि,भारत के सबसे महानतम।
विक्रमादित्य बारे में हमारे,स्कूलों- कालेजों में हम।।
शिक्षा पाठ्यक्रम में उनका,महत्वपूर्ण स्थान नहीं है।
हिंदू धर्म संस्कृति के इस नृप का वो स्थान नहीं है।।
महाराजा विक्रमादित्य के शासन प्रशासन एवं धर्म।
देश के नवनिहालों व,नागरिकों का यही बने कर्म।।
हमारी संस्कृति का ज्ञान,हमारी पीढ़ियाँ जान सकें।
जय हिन्द जय भारत क्यों,कहते हैं वो जान सकें।।
ज्ञान विभूषण डॉ. विनय कुमार श्रीवास्तव
सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्रवक्ता-पी.बी.कालेज,प्रतापगढ़,उ.प्र.
(शिक्षक,कवि,लेखक,समीक्षक,लघुकथाकार एवं समाजसेवी)
इंटरनेशनल ज्वाइंट ट्रेजरर, 2023-2024, ए. सी.आई.
वरिष्ठ समाजसेवी-प्रांतीय,राष्ट्रीय,अंतरराष्ट्रीय सेवा संगठन




