
धीर वीर गंभीर सदा कहें,गिन-गिन कर पैर रखना।
बुजुर्गों की राय रहे हितकारी,मानों उनका कहना।।
अनुभव से सदैव बात करें,सम्भल के हरदम रहना।
दूरदर्शी उच्च सोच रखो,हर काम ध्यान से करना।।
बड़ी बोल भी न बोलते,अपने शुचि लक्ष्य ही रहते।
बातूनी गप्पी लोगों सम वे,समय व्यर्थ नहीं करते।।
अपने स्वप्नों की पूर्णता में,दिन-रात सजग हैं रहते।
गिन-गिन के कदम रखते,संभल-संभल हैं चलते।।
ईश्वर अपने बच्चों को,चाहें नेक राह ही चलें सदा।
एहतियात से वे चलें हमेशा,हरेक फर्ज करें अदा।।
लापरवाह रहें कभी नहीं वे,भूले से भी यदा-कदा।
ढंग से रहो जीवन में,गिन-गिन कर पैर रखें सदा।।
मात-पिता सब बच्चों को,यही शुभ मार्गदर्शन देते।
जल्दबाजी में पग न धरो,गुरु भी यही शिक्षा देते।।
संवेदनशील विषयों मुद्दों में,विवेकपूर्ण निर्णय लेते।
गिन-गिन कर पैर रखने से,ये कबहुँ कष्ट नहीं देते।।
मुहावरे लोकोक्तियाँ साहित्य,सद् समाज के दर्पण।
मानव जीवन हेतु हैं शिक्षाप्रद,बड़ अमूल्य अर्पण।।
गिन-गिन पैर रखो वीर-सा,भागें शत्रु करें समर्पण।
डर-सम्भल कर चलने का,ये रखना ध्यानाकर्षण।।
ज्ञान विभूषण डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव
सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्रवक्ता-पी.बी.कालेज,प्रतापगढ़,उ.प्र.




