
न जाने क्या लिखा है , हाथो की चंद लकीरों में, चाहत का कोई मोल नहीं, लगता है अब तकदीरों में, खुशियाँ दरवाजे पर दस्तक, देकर के फना हो जाती हैं,
झूठी मुस्कानें देकर, अब थक से गये तस्वीरों में ॥
विनीता चौरासिया शाहजहाँपुर उत्तर प्रदेश

न जाने क्या लिखा है , हाथो की चंद लकीरों में, चाहत का कोई मोल नहीं, लगता है अब तकदीरों में, खुशियाँ दरवाजे पर दस्तक, देकर के फना हो जाती हैं,
झूठी मुस्कानें देकर, अब थक से गये तस्वीरों में ॥
विनीता चौरासिया शाहजहाँपुर उत्तर प्रदेश