
1 — नमामी मातु शारदे, ऐसा दो वरदान।
उन्नति के पथ पर चलूं , मिट मेरा अज्ञान।
करूं तुम्हारा ध्यान मैं, आठ पहर दिन रैन।
कलम सतत चलती रहें , देना इतना ज्ञान।
2- हे माता श्वेताम्बिके , निश दिन गाए गान ।
अन्तस भावों से भरे, करें तेरा गुण गान ।
वीणा की झंकार से , कर जग का कल्याण —
मात जीवन में भर दो , तुम अविरल मुस्कान ।
डॉ स्वाति पाण्डेय ‘प्रीत’
लखीमपुर-खीरी




