सैकड़ों कृतियां,हजारों सम्मान बेहिसाब,पत्रिकाओं से बिस्तर पेटी भरी, डॉ रामशंकर चंचल

पचास साल से हर हालत में हर समय सतत् साधना और तपस्या लीन डॉ रामशंकर चंचल जिसने उम्र के 17 साल में आकाशवाणी से सृजन उपलब्धि हासिल कर आकाशवाणी के चर्चित साहित्य साधक बने आज उम्र के 68 साल में भी उसी ऊर्जा से लगे हुए चौकाने वाली उपलब्धियां के साथ विश्व पटल पर छाया हुआ झाबुआ मध्य प्रदेश का सुखद चर्चित नाम है

सैकड़ों कृतियां हजारों सम्मान और अथाह प्रकाशन बेहिसाब सृजन से घर की बिस्तर पेटी भरी है दीवारों पर जगह नहीं किस तरह लगा हुआ होगा यह इंसान अपने जीवन में साहित्य साधना में सोच कर सचमुच खुद डॉ रामशंकर चंचल चौक जाते है
सालों से प्रतिदिन हजारों द्वारा सराहा जाता है पढ़ा जाता है सुना जाता है आज के समय ऐसे विरले साहित्य साधक देश में कितने होगे
जिन्हें सालो से प्रतिदिन सैकड़ों हजारों द्वारा सराहा जाता है पढ़ा और सुना जाता है शायद उंगलियों पर गिनती की जा सकती हैं और ऐसा इतिहास रचता झाबुआ मध्य के पिछड़े अंचल में जो सर्वाधिक पिछड़े अंचल के नाम से जाना जाता है और साहित्य संगीत जैसी क्ल की बात करना यहां बेमानी लगती हैं उस जगह में सारा जीवन व्यतीत कर यह इतिहास रचता डॉ रामशंकर चंचल आज सचमुच सैकड़ों के लिए प्रेरणा स्रोत बने हुए हैं न जाने कितने ही उनकी रचनाओं को पढ़ सुन कर कवि साहित्यकार बन गए है
जिंदगी की दौड़ में कितना कुछ अपनों को खो चुके डॉ रामशंकर चंचल आज भी उनकी उपस्थिति सदा ही अपने साथ महसूस करते हुए जी रहे हैं एकदम सहज सरल इंसान सादगी लिए मानव सोच और चिंतन के धनी जिन्होंने सोशल मीडिया में चर्चित हो मानवीयता संवेदनशील की अद्भुत मशाल को जीवन्त किया है और लाखों चाहने वालों को यह पाठ पढ़ाया है कि मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं है
धन्य धरा झाबुआ मध्य प्रदेश जहां सचमुच ईश्वर कृपा से ऐसे महान व्यक्तिव सहज सरल इंसान का जन्म हुआ जो सदियों जिंदा रहेगा अपने सतत् कर्म से और प्रेरित करते हुए आनेवाली युवा पीढ़ी को मार्ग दर्शन देगा




