साहित्य

रिश्ते नाते

राजीव त्रिपाठी

आज नहीं फिर किसी दिन
रिश्ते नाते धोखा हर दिन!!
हम पर यह इल्ज़ाम है आया
कितने धोखे खाएगा दिल!!
कितने ही रिश्ते नाते हैं
जो रहते हमसे अनभिज्ञ!!
रिश्तो का मोल नहीं जिनको
गिरे रहते हैं रिश्तो से हर दिन!!
मुंँह में राम बगल में छुरी
रखते देखें हमने निस दिन!!
प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है रिश्तो में
कोई नहीं जीता हारा सब दिन!!
कौन किसी के काम आएगा
होड़ मची है बुरे हैं सब दिन!!
स्वार्थ बिना नहीं निभते हैं
लालच धोखा फ़रेब हर दिन!!
प्यार का कोई मोल नहीं है
जिस दिन दिया मिले उसी दिन!!
रिश्ते कमज़ोर है होते जाते
कोई मुझे भी संभाले किसी दिन!!
आज नहीं फिर किसी दिन…

– राजीव त्रिपाठी
उदयपुर राजस्थान

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