
कई बार मना किया गया
मत पियो शराब
सुनता कौन है
आधी रात तक
एक चटकारेदार
मजेदार पैग
हलक के नीचे ली जाती है
सुबह बोलते हैं
एकदम मस्त नींद आई
नहीं माना वह
बार-बार हिदायत दी गयी
कम उम्र में सदा के लिए
गहरी नींद आ गयी
….
जयचन्द प्रजापति ‘जय’
प्रयागराज




