
तुम्हारी बिन इजाजत प्यार को स्वीकार करता क्या।
तुम्हें अपना बनाने के लिए इकरार करता क्या।।
बनाई है धरा अंबर सुनो उपकार है तेरा।
सजाया चांद तारों से यही श्रृंगार करता क्या।।
करो कुछ काम ऐसे भी रहे बस देखती दुनिया।
सभी में है बुरा अच्छा भला संसार करता क्या।।
सफर है दूर तक करना तुम्हारा साथ है अच्छा।
सुनो अहसास भावों से कभी इनकार करता क्या।।
सभी मिलकर रहें हम सब यही फरियाद ममता की,
भरोसा ईश पर रखना लडा़ई रार करता क्या।
*****************************
ममता झा मेधा
डालटेनगंज




