
काली -काली अँधियारी रातों में
आकाश भरा है तारों से,
कुछ तारे हैं छोटे -छोटे
कुछ तारे हैं बड़े -बड़े से,
कुछ चमचम करके चमक रहे हैं
कुछ जुगुनू की मानिंद टिमटिमा रहे हैं,
कालीअँधियारी रातों में,
आकाश भरा है तारों से |
जीवन में थे अगणित तारे
लगते थे वो –प्यारे -प्यारे ,
लगते थेअपनेपन से –कुछ
लगते थे कुछ मित्र तुल्य से,
जो -बिछड़ गये इस जीवन से
जो अब..,
बन कर एक सितारा
आसमान में ,
विचरण करते हैं
स्वछंद रूप में,
इस काली अँधियारी रातों में,
आकाश भरा है तारों से |
शशि कांत श्रीवास्तव
डेराबस्सी मोहाली, पंजाब




