साहित्य

धरती का बढ़ता तापमान

डॉ. राजेश कुमार शर्मा पुरोहित

तवे सी जलती है धरती बढ़ रहा तापमान है।
इंसान ने मतलबपरस्ती में काटे वृक्ष अनेक हैं।।
भूमंडलीकरण के कारण पृथ्वी गर्म हो रही है।
ग्लेशियर पिघल रहे व चट्टाने खिसक रही है।।

हरियाली धरती की खत्म होती जा रही दोस्तों।
वन संपदा जल सम्पदा सारी खत्म हो रही है।।
जंगली जीव जंतु अब गिनती के ही दिखते हैं।
पक्षियों की प्रजातियां लुप्त होती जा रही है।।

खग कलरव अब सुनाई नही देता आसपास।
बागों में कोयल व चिड़ियों की चहचहाहट।।
मोर का नृत्य करना दादुर के बोलने के स्वर।
अब कहीं कहीं सुनाई देता है बाग बगीचो में।।

धरती के बढ़ते तापमान का कारण औधोगिकरण।
बढ़ते वाहन प्रदूषण पेड़ों का लगातार कम होना।।
हरियाली के स्थान पर बंजर भूमि के ऊसर मैदान।
सूखे दरख्तों की संख्या बढ़ते जाना वर्षा कम होना।।

वातावरण में जहरीली गैसों का रिसाव बढ़ रहा है।
अब सूर्य की किरणें सीधी ही धरती पर पड़ रही है।।
ओजोन परत में छेद होने से धरती का ताप बढ़ रहा।
बढ़ते वायु जल प्रदूषण से धरती मां गरम हो रही है।।

-डॉ. राजेश कुमार शर्मा पुरोहित
भवानीमंडी

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