
गरीबी एक शिक्षक सी-
हमें जीना सिखाती है।
अभावों में भी भावों से-
गरल पीना सिखाती है।।
गरीबी वो तुला ठहरी-
जो रिश्ते तोल देती है।
निगाहों के सहारे ही-
ये दिल की बोल देती है।।
गरीबी ही फटा आँचल-
हमें सीना सिखाती है।।
गरीबी के निकष कहते-
ठोकर खा के उठ जाना।
परिश्रम कर कमा खाना-
उसी से लक्ष्य को पाना।।
यकीनन में गरीबी ही-
सम्भलना भी बताती है।।
मुश्किल में भी धीरज की,
परीक्षा नित्य लेती है।
यही अभिशाप जीवन की,
ये शिक्षा रोज देती है।।
असली पाठ जीवन के-
गरीबी ही पढ़ाती है।।
– डॉ.उदयराज मिश्र




