
जगदंबिके भवानी बिनती सुनो हमारी।
आए “शरण” तुम्हारी तारा त्रिलोक रानी।
जगदंबिके …..।
तू प्रेम रस सुधा है, तू ही मेरी है आशा
तेरी कृपा मिले तो, फिर कौन सी निराशा ।
जगदंबिके …..।
जग ने मुझे डराया,कई बार है गिराया
माता तुम्हीं ने आकर हर बार है बचाया ।
जगदंबिके …..।
पूजा विधि न जानूँ , सुर ताल भी न जानूँ,
तुम ही बता दो माता, क्या आरती मैं गाऊँ।
जगदंबिके….।
भक्तों की तारिणी तुम ,शत्रु संहारिणी तुम।
माया तुम्हारी सब में, छाया तुम्हारी सब में।
जगदंबिके….।
मंजुला शरण ‘मनु’
राँची, झारखण्ड़।




