साहित्य

फोन मिलाते रहना

बंदना मिश्रा

ना होना कभी बेखबर।
खबर लेते रहना।
दिन,दोपहर, सुबहो, शाम,
फोन मिलाते रहना।

बेटा अकेला है परदेश में।
अकेले रहने ना देना।
जब तक ना हो जाए बात।
फोन मिलाते रहना।

फोन से ही रोज,
उसकी खबर लेते रहना।
उसका ना मिले तो अगल, बगल,
आस , पड़ोस में भी मिलाते रहना।
फोन मिलाते रहना।

कभी डांट से,कभी फटकार से।
कभी प्यार से समझाते रहना।
चेहरा उसका निहारते रहना।
फोन मिलाते रहना।

अपनी जिंदगी की जमा पूंजी।
सम्भाल कर रखे रहना।
कितना भी हो वो नाराज़।
तुम फोन मिलाते रहना।

बंदना मिश्रा
देवरिया उत्तर प्रदेश

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