श्री देव दीप साहित्य संगम की मासिक काव्य गोष्ठी सम्पन्न
कवियों की वाणी पर माँ शारदा विराजमान रहीं, साहित्यिक रसधारा में सराबोर हुए श्रोता

गोरखपुर, 28 जून। श्री देव दीप साहित्य संगम, गोरखपुर की नियमित मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन रविवार को श्री विश्वकर्मा मंदिर, मानसरोवर, गोरखनाथ स्थित सभागार में साहित्यिक गरिमा एवं उत्साहपूर्ण वातावरण के बीच सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में दूर-दराज के जनपदों से पधारे वरिष्ठ एवं नवोदित कवियों तथा कवयित्रियों ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।


कार्यक्रम का शुभारम्भ माँ वीणा वादिनी सरस्वती की वंदना से हुआ। सरस्वती वंदना की भावपूर्ण प्रस्तुति प्रेमलता ‘रसबिंदु’ ने की, जिससे पूरा सभागार भक्तिमय एवं साहित्यमय वातावरण में सराबोर हो उठा।
गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार सुनील श्रीवास्तव ‘राज’ ने की। मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. भारतेन्दु सिंह तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में वंदना सूर्यवंशी की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
कार्यक्रम का प्रभावशाली संचालन श्री देव दीप साहित्य संगम के संस्थापक एवं मुख्य ट्रस्टी दिनेश गोरखपुरी ने किया। अपनी सहज, ओजपूर्ण एवं प्रभावी संचालन शैली से उन्होंने कार्यक्रम को निरंतर ऊर्जावान बनाए रखा।
काव्य पाठ के क्रम में निर्मल कुमार, प्रेमलता ‘रसबिंदु’, डॉ. भारतेन्दु सिंह, सुनील श्रीवास्तव ‘राज’, वंदना सूर्यवंशी, इंजीनियर दानिका प्रसाद, राघवेन्द्र मिश्रा, बद्रीनाथ विश्वकर्मा ‘संवरिया’, कुमार अभिनीत, दिनेश गोरखपुरी तथा नन्दलाल मणि त्रिपाठी ‘पीताम्बर’ ने दोहा, चौपाई, गीत, ग़ज़ल एवं मुक्तक सहित विभिन्न काव्य विधाओं में अपनी रचनाएँ प्रस्तुत कीं। उनकी सशक्त प्रस्तुतियों पर उपस्थित साहित्यप्रेमियों ने तालियों की गड़गड़ाहट से भरपूर उत्साहवर्धन किया।
समापन सत्र में संस्था के संरक्षक नन्दलाल मणि त्रिपाठी ‘पीताम्बर’ ने सभी साहित्यकारों, अतिथियों एवं उपस्थित जनों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए साहित्य साधना को निरंतर आगे बढ़ाने का आह्वान किया। मुख्य ट्रस्टी दिनेश गोरखपुरी ने संस्था के उद्देश्यों एवं आगामी साहित्यिक गतिविधियों की जानकारी देते हुए राष्ट्रभक्ति, भारतीय संस्कृति और मानवीय मूल्यों पर आधारित सृजन को समय की आवश्यकता बताया। अंत में उन्होंने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करते हुए अगली मासिक काव्य गोष्ठी की तिथि घोषित की और सभा के समापन की घोषणा की।




