
मानसून के नए रंग,,,,,
नए-नए रंग लेकर आया है मानसून,
पानी बिना जीवन में सब होता है सून।
प्यासी वसुंधरा देखो कैसे मुस्कुराई?
मानसून के आने से खुशियां है आई।
हर फूल महका हर डाली इठलाई,
मौसम ने ठंडी ठंडी बयार चलाई।
जल से भरकर नदी भी बहने लगी,
हर कली अपनी कहानी कहने लगी।
माटी की सौंधी खुशबू मन को भा गई,
पिया मिलन की यह प्यारी रूत आ गई।
इंद्रधनुष के रंग जीवन में आने लगे,
मौसम के रंग देख हम मुस्कुराने लगे।
वर्षा की बूंदे धरती पर पड़ने लगती है,
वसुंधरा दुल्हन सी सजने लगती है।
झरने और नदियां गीत गुनगुनाते हैं,
बादल खुश होकर जल बरसाते हैं।
मानसून में तपती धरा तृप्त हो जाती,
चारों ओर मनोहर हरियाली छा जाती।
मानसून में भीग जाता है हमारा अंग,
कितने प्यारे होते हैं मानसून के रंग।
सौ, भावना मोहन विधानी ✍️
अमरावती महाराष्ट्र।



