साहित्य

मणिमाल छंद वार्णिक

डॉ उषा

सपने सभी सच हो रहे,

हद में बसे भगवान।

सुनते सभी मन याचना,

सच का हुआ जयगान।

रहना यहाँ मन खोल के,

तब ही बने धनवान।

कहना सदा सच जान के,

जब ही मिले कद्रदान।

2

सुख जो सभी सुमरें यहाँ,

तब पूर्ण हों अरमान।

घर द्वार है परिवार से,

करते सभी श्रमदान।

सबको नहीं मिलते यहाँ

वश भक्त के भगवान।

व्रज भूमि में नित कृष्ण को,

भजते रहे रसखान।।

3

सबको दिया जब प्रेम है,

तब तो मिला सुर धाम।

सच तो सभी यह जानते,

सत कर्म ही सब काम।

मन राम नाम सभी कहे,

शबरी भजा हरि नाम।

तब मोक्ष ही सबको दिया

जिसने कहा प्रभु राम।।

डॉ उषा अग्रवाल जलकिरण

छतरपुर मध्यप्रदेश

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