साहित्य

नव वर्ष

दुर्गेश मोहन

नव वर्ष है मनुष्यों का
खुशियों के उत्कर्ष का।
लोगों के जीवन दान का
विकास ज्ञान _विज्ञान का।
नव वर्ष है शिखर पर पहुंचने का
रिकार्ड कायम करने का।
दुश्मन को ध्वस्त करने का
सपनों को साकार करने का।
नव वर्ष में मुबारक की
याद आती है।
इंसानों की खुशियों का
इजहार कराती है।
नव वर्ष खुशियां प्रदान करे
सभी का कल्याण करे।
यही मेरी दुआ है
यही मेरी आरजू है।
यही मेरी शुभकामना है
यही मेरा संदेश है।
यही मेरी खुशियों का
संदेश दिलाती है।
यही मेरे कार्य हेतु
आदेश दिलाती है।
यही मेरा मार्गदर्शक है
सबके जीवन में आकर्षक है।
दुर्गेश मोहन
बिहटा, पटना , बिहार (भारत)

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