
ए जाते हुए लम्हे जरा तो तुम ठहरो,
बहुत जल्दी में रहते कुछ पल दे दो
मैने तुमसे प्यार किया उसे निभा दो,
मेरे ख्वाबों को अपने दिल में जगह तो दो।
हसरत का एहसास तुमने कराया,
जाते हुए साल मेरे आगोश में आने दो।
तुमसे मिलने की आरजू हमारी रही है,
एक बार मिलने की इजाजत तो दो।
मंजिल को पाने की ख्वाहिश हरदम रही,
हमसफ़र साथ रहे वही सफर दो।
बीत गया साल तेरी ही आरजू में
पच्चीस में तू गया संसार में वो यादें न दो।
बचपन की यादों में उषा की समाये रहे,
ऐसी जिन्दगी की कम सांसे कभी न दो।
डॉ उषा अग्रवाल जलकिरण
छतरपुर मध्यप्रदेश




