साहित्य
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बालगीत
* हमारे आंगन का कोना लगे गौरैया बिन सूना * पंख पसारे वो आती थी बच्चों को भी संग लाती…
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कहानी : पंछियो का दाना पानी
एक मैं ऑफिस से घर आया और मेरी बेटी आठ साल की एक गिलास पानी लायी मेरी बेटी मुझसे बोली”…
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गज़ल
पावन धरा अयोध्या अवतार हो गया है गंगा नहा के जीवन केदार हो गया है अब पूर्ण हो गई है…
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अब गौरैया ने आँगन में, आना छोड़ दिया
अब गौरैया ने आँगन में, आना छोड़ दिया। वृक्ष काटकर नीड़ मनुज ने, उसका तोड़ दिया।। स्वार्थ पूर्ति खातिर मानव…
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ऊं ब्रां ब्रीं ब्रूं ब्रहाचारिण्यै नमः
नवरात्री के दिनों में ये दूसरा दिन ब्रहाचारिणी देवी के अवतारका प्रतीक है ।इनके अवतार का अर्थ ही तप का…
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नन्ही गोरैया
छत की मुंडेरों पर चहकती थी जो, वो नन्ही सी गोरैया कहाँ खो गई? कभी आँगन की रौनक थी जो,…
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अंतिम ऊंचाई,,,
अंतिम ऊंचाई,,, ऊंचाइयों का कोई पैमाना नहीं होता, क्या पहली और क्या अंतिम ऊंचाई? दिल में उम्मीदों के दीए तब…
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आपसी बातें
अपनों के बीच जो गहरी बात होती है, वही तो रिश्तो की असली सौगात होती है। ना कोई परदा ना…
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नारी तू अबला नही
भले ही माथे पर हो लकीरें परेशानी की, लेकिन तुझे मुस्कुराना ही होगा। माथे पर पड़ी सिलवटों को सबको ना…
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गौरया दिवस
नन्ही, प्यारी – प्यारी चिड़िया, उड़ती फिरती प्यारी चिड़िया। गौरैय्या है सबकी प्यारी, घर – आंगन में बैठे चिड़िया। अब…
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