साहित्य
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पूर्णिका
दिल की उन यादों को सबसे मैं छुपाऊँ कैसे मानता अब दिल नहीं तो मैं मनाऊँ कैसे ।। नेह 1…
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मेरे जन्मदिन पर — संस्मरण (15 जून) चलो आज तुम्हें लिखती हूँ
ऐसा नहीं है कि तुम आज याद आये हो यादों में तो समाहित ही हो तुम तुम्हें गुनती हूँ, सुनती…
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कविता: पिता होता है महानायक
पिता सदैव होता महानायक हर बालक के जीवन का नायक, हर मुश्किल हर कठिन समय में संतानों का सर्वश्रेष्ठ सहायक।…
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प्रदत्त शब्द घोटाला विधा कविता
ऊपर से नीचे तक फैला, रिश्वतखोरी राज यहाँ। घोटाला कर रहे लोग हैं, गंदा हुआ समाज जहांँ।। नियमों की…
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जब जंगल बोल उठे
कुछ दिनों पहले मैं अपने गाँव गया था। वही गाँव जहाँ मेरा बचपन बीता था। बरसों बाद जब वहाँ पहुँचा…
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मुखौटे
चेहरे पर लगाकर मुखौटे, जाने लोग कैसे जीते हैं? चेहरे पर मुस्कान रखकर, कैसे दर्द के घूंट पीते हैं? …
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ग़ज़ल
खुशबू फ़िज़ा में फैली आहट से तुम्हारी, महत्व उठी है देखो चाहत से तुम्हारी। गुमसुम खड़ी थी धड़कन सदियों…
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जय लक्ष्मी नारायण
जय लक्ष्मी माता, जय नारायण, कर दो जीवन आज सुहावन। शंख ध्वनि से मंगल हो, हर मन में उजियारा…
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पंक्ति आधारित
क्या लाया था जो रोता है, क्या जाएगा साथ जी। हानिलाभ जीवन मरण, यश अपयश विधि हाथ जी. बचपन…
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