साहित्य
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जन्म_जन्म_का_साथ
सुख-दु:ख के दो रंगों के संग, बहती रहती जीवन की धारा। साथ- साथ चलते हुए गाते, जनम जनम का साथ…
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मेरी माँ
जब तू मेरी उंगली कस कर पकड़ती है, जब तू सारी दुनियां मुझको दिखलाती है, मैं जब रोता हूं,दिखा खिलौना…
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नारी तो नारायणी है
कितनी सहनशील होती है नारी, सागर-सी गहरी सोच रखती है। परिवार को बखूबी संभालती है, संस्कारों का बीजारोपण करती है।…
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होली
रंग_गुलाल से भरपूर, होली में लोग होते सराबोर। सभी करते मस्ती और मचाते शोर। प्रहलाद _होलिका का यह पर्व, दिलाती…
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सृष्टि का सृजन
सृष्टि के कण-कण बसता ,महादेव का आधार है , पूर्ण होती यह दुनिया तब ,जब उनका परिवार है । हँसी…
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ये होरी रंगों का त्यौहार
लाल गुलाबी धवल सुनहरे, रंगों का है ये मेल, मिटा रहा है ऊँच-नीच का,जग का सारा खेल। भीगी चुनर, भींगे…
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महिला दिवस पर पुरुषों में घबराहट (हास्य-व्यंग्य)
महिला दिवस के दिन एक बगीचे मे भीड़ इकट्ठा होने लगी। देखते ही देखते महिलाओं की विशाल भीड़ जमा हो…
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बेबसी
लाचार सा खुद को पाती हूँ, जब तेरे ज़ख्मों पर मरहम न लगा पाती हूँ, तू दर्दों से लड़ता रहता…
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ज्ञान देना यहाँ सब कोई चाहता है
चरित्र की महिमा शांत स्थिर होती है आचरण जैसे भी हों अनुसरण होते हैं ज्ञान व पैसा बहती धारा के…
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