साहित्य
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दो जून की रोटी
दो जून की रोटी, जीवन की जरूरत। जिसके लिए लोग, दिन-रात मेहनत करते। भूखे पेट की आग, ज्वाला से धधकती…
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वरना इस दुनिया में और क्या रखा है
जीवन में हमें दिन के समय शुभ और परोपकारी कार्य कर सकें जिनकी वजह से हमें जीवन के पूर्ण सुख…
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होआदमी मिसाल बेमिसाल गिनती किरदारों में हो
होआदमी मिसाल बेमिसाल गिनती किरदारों में हो। संवेदना सरोकार की बस विनती ही हजारों में हो।। ** न थके ही…
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दो जून की रोटी का सफर
भोर हुई सुरज निकला। नई आशाओं नई उम्मीदो के साथ। दो जून की रोटी के लिए चला किसान के संग।…
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भोर का सपना
कहते हैं भोर का सपना सच होता है, जो चाहे ब्रह्मांड वह हमें दे देता है। बस प्रार्थना हो सच्चे…
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दो जून की रोटी
अपनी दृढ़ संकल्पों से ही श्रमिक भाग्य अपना लिखता। संघर्षों के अंँधियारों में, उसका रूप सदा दिखता।। श्वेत बहा…
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गर्मी की सरकार गीत
जेठ माह जग में ले आया, गर्मी की सरकार। क्रोधी सूरज की भृकुटि चढ़ी , आग लगाए धूप। कैद हुआ…
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नारी आत्म सम्मान
अब टकराती हर प्रस्तर से, कोई मौन रुदन स्वीकार्य नहीं अबला नहीं वो सबला है, अपमान अब शिरोधार्य नहीं बना…
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रोटियाँ दो जून की
करती सारे बबाल दो जून की रोटियाँ कर देती हैं बेहाल दो जून की रोटियाँ। पसीना सान के तब सनता…
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आज की नारी सब पर है भारी
चाहे कोई नेता हो या व्यापारी। हौसलों की ऊँची उड़ान लिए, लिखती जाती नई सफलता की क्यारी। सूरज से…
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